हिंदू व्यक्ति की जान बचाने के लिए मुस्लिम ने तोड़ा उपवास, रक्त देकर अजय की बचाई जान

Millat Times Staff

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21 May 2018 (Publish: 12:07 PM IST)

20 वर्षीय अजय बजलवान की तबियत अचानक बेहद खराब हो गई थी। इसके लीवर संक्रमण हो गया था जिसकी वजह से उसे देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों का कहना था कि अजय को खून की सख्त जरूरत है क्योंकि लीवर संक्रमण की वजह से रक्त प्लेटलेट्स की तेजी के साथ कमी हो रही थी। अजय के पिता बहुत परेशान थे क्योंकि अजय को A + खून चाहिए था जो बहुत खोजने के बाद भी नहीं मिल रहा था। ऐसे समय में एक मुस्लिम रोज़ेदार आरिफ खान दूत बनकर उनके पास पहुंचा और रक्त देकर अजय की जान बचाई।

आरिफ के अजय तक पहुँचने के कदम इतना आसान नहीं था और वह भी तब जब कि आरिफ और अजय के बीच पहले से कोई जान पहचान नहीं थी। वह तो सामाजिक मीडिया था जिसने आरिफ तक यह ख़बर पहुँचाई कि अजय नाम के किसी व्यक्ति को A + रक्त की जरूरत है और आरिफ बिना यह सोचे कि उसका रोज़ा टूट जाएगा, अजय की मदद करने के लिए अस्पताल से भागा। अस्पताल पहुंचने के बाद जब चिकित्सक ने उसे रक्त दान करने से पहले कुछ खाने के लिए कहा तो आरिफ ने बताया कि वह तेजी से है। लेकिन डॉक्टर ने बिना कुछ खाए पिये रक्त लेने से मना कर दिया।

ऐसी स्थिति में आरिफ ने अजय जीवन बचाने की खातिर अपना उपवास तोड़ दिया और अजय के साथ मानवता को भी जीवन दी।इस पूरे मामले से संबंधित अजय बजलवान पिता बताते हैं कि वे बहुत परेशान थे और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बहुत प्रयास के बावजूद A + रक्त नहीं मिल पा रहा था। फिर किसी के कहने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश दिया और मदद का आग्रह किया, साथ ही इसमें अपना फोन नंबर भी दिया। उन्होंने इस पोस्ट वहाटस एप्लिकेशन पर भी साझा किया जो आरिफ खान नामक व्यक्ति की नज़र से गुज़रा। आरिफ ने अविलंब, दिए गए नंबर पर फोन किया और अस्पताल का पता लेकर वहाँ पहुँच गया

सूत्रों के मुताबिक आरिफ खान ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरनटस और स्टूडेंट्स राइट्स’ नामक संस्था के प्रमुख हैं। उनके अंदर मानवता की भावना से भरा है और इसीलिए उन्होंने अजय की मदद करने में जरा भी देर नहीं लगाई। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि रोगी मुसलमान या हिंदू। वे तो बस यह जानते थे कि किसी एक व्यक्ति की जान बचाने के।

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